Sunday, 16 September 2012

ग़ज़ल 3 6 ( जो देश में हो वो होने दो ) - लोक सेतिया "तनहा"

जो देश में हो वो होने दो - लोक सेतिया "तनहा"

जो देश में हो वो होने दो ,
पहरेदारों को    सोने दो।

कानून उधर काम अपना करे ,
अपराध इधर कुछ होने दो।

लोग उनको झुक के सलाम करें ,
ये नशा भी उनको होने दो।

तब होगा बचाव का काम शुरू ,
घर बाढ़ को और डुबोने दो।

वो कुछ न हकीक़त जान सकें ,
ख्वाबों में उन्हें तो खोने दो।

रहने दो न क़त्ल का कोई निशां ,
उन्हें खून के धब्बे धोने दो।

क्यों फ़िक्र है इतनी जनता की ,
जनता    रोती है ,     रोने दो।  

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