Sunday, 9 September 2012

ग़ज़ल 1 7 ( झूठ को सच करे हुए हैं लोग ) - लोक सेतिया "तनहा"

झूठ को सच करे हुए हैं लोग - लोक सेतिया "तनहा"

झूठ को सच करे हुए हैं लोग ,
बेज़ुबां कुछ डरे हुए हैं लोग।

नज़र आते हैं चलते फिरते से ,
मन से लेकिन मरे हुए हैं लोग।

उनके चेहरे हसीन हैं लेकिन ,
ज़हर अंदर भरे हुए हैं लोग।

गोलियां दागते हैं सीनों पर ,
बैर सबसे करे हुए हैं लोग।

शिकवा उनको है क्यों ज़माने से ,
खुद ही बिक कर धरे हुए हैं लोग।

जितना उनके करीब जाते हैं ,
उतना हमसे परे हुए हैं लोग।

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