Tuesday, 18 September 2012

ग़ज़ल 1 2 4 ( क्या बतायें तुम्हें लोग क्या हो गये ) - लोक सेतिया "तनहा"

क्या बतायें तुम्हें लोह क्या हो गये - लोक सेतिया "तनहा"

क्या बतायें तुम्हें लोग क्या हो गये  ,
आदमी थे वो सब जो खुदा हो गये।

सब हमारा ये अंजाम देखा किये ,
हम हमेशा नई इब्तिदा हो गये।                                ( इब्तिदा = शुरुआत )

क्या हुआ था हमें , हम नहीं जानते ,
बस उन्हें देख कर हम फ़िदा हो गये।

जब सुनाने लगे हम कहानी नई ,
छोड़ महफ़िल सभी अलविदा हो गये।

हर नज़र आपको देखती रह गई ,
आप सब को लुभाती अदा हो गये।

उनकी नज़रों के सब जाम पीते रहे ,
वो पिलाते रहे , मयकदा हो गये।                         ( मयकदा =शराबखाना )

जिनको आया नहीं मांगने का हुनर ,
अनसुनी रह गई इक सदा हो गये।                            ( सदा =प्रार्थना )

खुद बनाया  कभी था हसीं   कारवां ,
छोड़ कर खुद ही "तनहा" जुदा हो गये।

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