Sunday, 19 August 2012

अब हमें दिल की बात कहने दो ( नज़्म / ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया = 1 7 भाग एक

अब हमें दिल की बात कहने दो ,
हो जो मुमकिन तो अश्क बहने दो !
सब चले जाएंगे कभी न कभी ,
कोई मेहमान अभी तो रहने दो  !
वक़्त इसका इलाज कर देगा ,
दिल को अब तो ये दर्द सहने दो  !
ख़त्म कर दो खामोशियों को आज ,
कहना है जो लबों को कहने दो  !
रोक पाई न इश्क को दुनिया ,
ये तो दरिया है इसको बहने दो  !
देखो खुद बन के तुम तमाशाई ,
हिलती दीवार घर की ढहने दो  !

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