Sunday, 26 August 2012

ग़ज़ल 0 7 ( जा के किस से कहें हमको क्या चाहिए )

जा के किस से कहें हमको क्या चाहिए ,
ज़हर कोई न कोई दवा चाहिए  !
और कुछ भी तो हमको तम्मना नहीं ,
सांस लेने को थोड़ी हवा चाहिए !
हाल -ए -दिल आ के पूछे हमारा जो खुद ,
ऐसा भी एक कोई खुदा चाहिए !
अपनों बेगानों से अब तो दिल भर गया ,
एक इंसान इंसान सा चाहिए  !
देख कर जिसको मिट जाएं दुनिया के ग़म ,
कोई मासूम सी वो अदा चाहिए !
जब कभी पास जाने लगे प्यार से ,
बस तभी कह दिया फ़ासिला चाहिए !
ज़िंदगी से नहीं और कुछ मांगना ,
दोस्त "तनहा" हमें आपसा चाहिए !

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