Tuesday, 21 August 2012

ग़ज़ल 3 0 ( दिल में आता है सतायें उनको )

दिल में आता है सतायें उनको ,
बात ये कैसे बतायें उनको !
एक मुद्दत हुई दीदार किये ,
किस बहाने से बुलायें उनको !
वो तो हर बात पे हंस देते हैं ,
कभी रूठें तो मनायें उनको !
ये सितम हमसे न होगा हर्गिज़ ,
कि शबे हिज्र रुलायें उनको !
हमने पूछा था सवाल उनसे कभी ,
याद वो कैसे दिलायें उनको !
खुद ग़ज़ल हैं वो हमारे दिल की ,
क्या भला और सुनायें उनको !

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