Wednesday, 29 August 2012

ग़ज़ल 1 5 1 ( आपने जब पिलाना छोड़ दिया )

आपने जब पिलाना छोड़ दिया ,
मयकदे हमने जाना छोड़ दिया  !
रोज़ महफ़िल जमाना छोड़ दिया ,
घर किसी को बुलाना छोड़ दिया  !
अब कहीं आना जाना छोड़ दिया ,
आपका आशियाना छोड़ दिया  !
दोस्तों का ठिकाना छोड़ दिया ,
दुश्मनों से निभाना छोड़ दिया  !
ज़िंदगी को डराना छोड़ दिया ,
अब ज़हर रोज़ खाना छोड़ दिया  !
चारागर को बुलाना छोड़ दिया ,
दर्द को खुद बढ़ाना छोड़ दिया  !
गैर सारा ज़माना छोड़ दिया ,
आज "तनहा" ने माना छोड़ दिया  !
                                                       (  चारागर = डॉक्टर = चिकित्सक )

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