Saturday, 25 August 2012

ग़ज़ल 2 7 ( भुला दें चलो सब पुरानी खताएं ) नव वर्ष पर संकल्प

भुला दें चलो सब पुरानी खताएं ,
नई अपनी पहचान फिर से बनाएं  !
जो शिकवे गिले हैं निकालें दिलों से ,
करीब आ के हम हाथ अपने मिलाएं !
न मुरझाएं चाहे बदल जाए मौसम ,
हम आँगन में कुछ फूल ऐसे खिलाएं  !
न हम जी सकेंगे न तुम दूर रह कर ,
तो फिर दूरियां ये न क्यूँ हम मिटाएं  !
हो टूटा हुआ सिलसिला फिर से कायम ,
हमें तुम बुलाओ तुम्हें हम बुलाएं  !
खताएं हमारी जफ़ाएं तुम्हारी ,
बहुत हो चुकीं अब चलो मान जाएं  !
ज़मीं आस्मां चाँद तारों के नग्में ,
फिर इक साथ मिलकर तरन्नुम से गाएं  !

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