Friday, 24 August 2012

ग़ज़ल 1 3 0 ( हम सभी इस तरह बंदगी करते )

हम सभी इस तरह बंदगी करते ,
दुश्मनी छोड़ कर दोस्ती करते !
तुम अगर रूठते हम मना लेते ,
जो किया था कभी फिर वही करते !
जी सकेंगे नहीं बिन तुम्हारे हम ,
इस तरह से नहीं दिल्लगी करते !
क्यों नहीं छू लिया आसमां तुमने ,
काम मुश्किल नहीं गर कभी करते !
छोड़ आये जिसे घर तुम्हारा है ,
बस यही सोचकर वापसी करते !
ज़ुल्म सहते रहे हम ज़माने के ,
पर शिकायत किसी से नहीं करते  !
एक हसरत लिये चल दिये "तनहा" ,
मत लगाते गले बात ही करते  ! 

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