Friday, 10 August 2012

ग़ज़ल 9 8 ( सब लिख चुके आगाज़ हम अंजाम लिखेंगे ) - लोक सेतिया "तनहा"

सब लिख चुके आगाज़ हम अंजाम लिखेंगे - लोक सेतिया "तनहा"

सब लिख चुके आगाज़ हम अंजाम लिखेंगे ,
अब ज़िंदगी को ज़िंदगी के नाम लिखेंगे।

जब तक पिलायेंगे सभी पीते ही रहेंगे ,
लिखने लगे जब हम मुहब्बत, जाम लिखेंगे।

पाई सज़ाएँ बेखता उनसे तो हमेशा ,
अब हम मगर उनके लिए इनाम लिखेंगे।

उसको लिखेंगे ख़त कभी दिल खोल के हम भी ,
हम हो गये तेरे लिये बदनाम लिखेंगे।

साकी से पूछो हम हुए मदहोश नहीं थे ,
भर- भर पिलाये हैं उसी ने जाम  लिखेंगे।

होगा सुनाने का नया अंदाज़ हमारा ,
कोई ग़ज़ल हम जब किसी के नाम लिखेंगे।

लिखने लगे जब सच तो लिखना छोड़ मत देना ,
"तनहा" लिखेंगे , और सुबहो-शाम लिखेंगे।

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