Friday, 10 August 2012

ग़ज़ल 9 8 ( सब लिख चुके आगाज़ हम अंजाम लिखेंगे )

सब लिख चुके आगाज़ हम अंजाम लिखेंगे ,
अब ज़िंदगी को ज़िंदगी के नाम लिखेंगे !
जब तक पिलायेंगे सभी पीते ही रहेंगे ,
लिखने लगे जब हम मुहब्बत, जाम लिखेंगे !
पाई सज़ाएँ बेखता उनसे तो हमेशा ,
अब हम मगर उनके लिए इनाम लिखेंगे !
उसको लिखेंगे ख़त कभी दिल खोल के हम भी ,
हम हो गये तेरे लिये बदनाम लिखेंगे !
साकी से पूछो हम हुए मदहोश नहीं थे ,
भर- भर पिलाये हैं उसी ने जाम  लिखेंगे !
होगा सुनाने का नया अंदाज़ हमारा ,
कोई ग़ज़ल हम जब किसी के नाम लिखेंगे !
लिखने लगे जब सच तो लिखना छोड़ मत देना ,
"तनहा" लिखेंगे और सुबह शाम लिखेंगे !

No comments: