Wednesday, 29 August 2012

ग़ज़ल 5 7 ( मुश्किलों का नाम है ये ज़िंदगी ) - लोक सेतिया "तनहा"

मुश्किलों का नाम है ये ज़िंदगी - लोक सेतिया "तनहा"

मुश्किलों का नाम है ये ज़िंदगी ,
दर्द का इक जाम है ये ज़िंदगी।

याद रहता है हमें जो उम्र भर ,
मौत का पैगाम है ये ज़िंदगी।

मुस्कुराती सुबह आती है मगर ,
फीकी फीकी शाम है ये ज़िंदगी।

है कभी फूलों सी कांटों सी कभी ,
नित नया अंजाम है ये ज़िंदगी।

जानते ये राज़ "तनहा" काश हम ,
इक बड़ा ईनाम है ये ज़िंदगी।  

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