Monday, 27 August 2012

ग़ज़ल 5 3 ( इस दरजा एतबार क्यों ) - लोक सेतिया "तनहा"

इस दरजा एतबार क्यों - लोक सेतिया "तनहा"

इस दरजा एतबार क्यों ,
कहते हो बार बार क्यों।

कोई बताये किस तरह ,
ग़म का है इव्वास्तगार क्यों।

मुरझाये गुल कभी नहीं ,
उस को न इख्तियार क्यों।

जाने किसी के आने का ,
हम को है इंतज़ार क्यों।

पूछो न हमसे आज तुम ,
दिल का गया करार क्यों।

उनको सुना नई ग़ज़ल ,
"तनहा" है बेकरार क्यों।  

No comments: