Friday, 10 August 2012

ग़ज़ल 4 2 ( कैसे कैसे नसीब देखे हैं )- लोक सेतिया " तनहा "

कैसे कैसे नसीब देखे हैं - लोक सेतिया "तनहा"

कैसे कैसे नसीब देखे हैं ,
पैसे वाले गरीब देखे हैं।

हैं फ़िदा खुद ही अपनी सूरत पर ,
हम ने चेहरे अजीब देखे हैं।

दोस्तों की न बात कुछ पूछो ,
दोस्त अक्सर रकीब देखे हैं।

जिंदगी को तलाशने वाले ,
मौत ही के करीब देखे हैं।

तोलते लोग जिनको दौलत से ,
ऐसे भी कम-नसीब देखे हैं।

राह दुनिया को जो दिखाते हैं ,
हम ने विरले अदीब देखे हैं।

खुद जलाते रहे जो घर तनहा ,
ऐसे कुछ बदनसीब देखे हैं।   

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