Friday, 10 August 2012

ग़ज़ल 4 2 ( कैसे कैसे नसीब देखे हैं )

कैसे कैसे नसीब देखे हैं ,
पैसे वाले गरीब देखे हैं  !
हैं फ़िदा खुद ही अपनी सूरत पर ,
हम ने चेहरे अजीब देखे हैं  !
दोस्तों की न बात कुछ पूछो ,
दोस्त अक्सर रकीब देखे हैं  !
जिंदगी को तलाशने वाले ,
मौत ही के करीब देखे हैं  !
तोलते लोग जिनको दौलत से ,
ऐसे भी कम-नसीब देखे हैं  !
राह दुनिया को जो दिखाते हैं ,
हम ने विरले अदीब देखे हैं  !
खुद जलाते रहे जो घर तनहा ,
ऐसे कुछ बदनसीब देखे हैं  !  

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