Tuesday, 21 August 2012

ग़ज़ल 3 0 ( दिल में आता है सतायें उनको ) - लोक सेतिया "तनहा"

दिल में आता है सतायें उनको - लोक सेतिया "तनहा"

दिल में आता है सतायें उनको ,
बात ये कैसे बतायें उनको।

एक मुद्दत हुई दीदार किये ,
किस बहाने से बुलायें उनको।

वो तो हर बात पे हंस देते हैं ,
कभी रूठें तो मनायें उनको।

ये सितम हमसे न होगा हर्गिज़ ,
कि शबे हिज्र रुलायें उनको।

हमने पूछा था सवाल उनसे कभी ,
याद वो कैसे दिलायें उनको।

खुद ग़ज़ल हैं वो हमारे दिल की ,
क्या भला और सुनायें उनको।

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