Saturday, 25 August 2012

ग़ज़ल 2 7 ( भुला दें चलो सब पुरानी खताएं ) नव वर्ष पर संकल्प - लोक सेतिया "तनहा"

भुला दें चलो सब पुरानी खताएं - लोक सेतिया "तनहा"

भुला दें चलो सब पुरानी खताएं ,
नई अपनी पहचान फिर से बनाएं।

जो शिकवे गिले हैं निकालें दिलों से ,
करीब आ के हम हाथ अपने मिलाएं।

न मुरझाएं चाहे बदल जाए मौसम ,
हम आँगन में कुछ फूल ऐसे खिलाएं।

न हम जी सकेंगे न तुम दूर रह कर ,
तो फिर दूरियां ये न क्यूँ हम मिटाएं।

हो टूटा हुआ सिलसिला फिर से कायम ,
हमें तुम बुलाओ तुम्हें हम बुलाएं।

खताएं हमारी जफ़ाएं तुम्हारी ,
बहुत हो चुकीं अब चलो मान जाएं।

ज़मीं आस्मां चाँद तारों के नग्में ,
फिर इक साथ मिलकर तरन्नुम से गाएं।

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