Thursday, 9 August 2012

ग़ज़ल 2 6 ( शिकवा तकदीर का करें कैसे )

शिकवा तकदीर का करें कैसे ,
हो खफा मौत तो मरें कैसे !
बागबां ही अगर उन्हें मसले ,
फूल फिर आरज़ू करें कैसे  !
ज़ख्म दे कर हमें वो भूल गये ,
ज़ख्म दिल के ये अब भरें कैसे  !
हमको खुद पर ही जब यकीन नहीं ,
फिर यकीं गैर का करें कैसे  !
हो के मजबूर ज़ुल्म सहते हैं ,
बेजुबां ज़िक्र भी करें कैसे ! 
भूल जायें तुम्हें कहो क्यों कर ,
खुद से खुद को जुदा करें कैसे  !
रहनुमा ही जो हमको भटकाए ,
सूए- मंजिल कदम धरें कैसे  ! 

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