Thursday, 9 August 2012

ग़ज़ल 2 6 ( शिकवा तकदीर का करें कैसे ) - लोक सेतिया " तनहा "

शिकवा तकदीर का करें कैसे - लोक सेतिया "तनहा"

शिकवा तकदीर का करें कैसे ,
हो खफा मौत तो मरें कैसे।

बागबां ही अगर उन्हें मसले ,
फूल फिर आरज़ू करें कैसे।

ज़ख्म दे कर हमें वो भूल गये ,
ज़ख्म दिल के ये अब भरें कैसे।

हमको खुद पर ही जब यकीन नहीं ,
फिर यकीं गैर का करें कैसे।

हो के मजबूर ज़ुल्म सहते हैं ,
बेजुबां ज़िक्र भी करें कैसे।
 
भूल जायें तुम्हें कहो क्यों कर ,
खुद से खुद को जुदा करें कैसे।

रहनुमा ही जो हमको भटकाए ,
सूए- मंजिल कदम धरें कैसे। 

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