Friday, 17 August 2012

मैं रहूँगा हमेशा ( कविता ) 2 0 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

जिवित रहूँगा मैं ,
अपने लेखन में ,
हमेशा ,
मौत भी ,
नहीं मिटा सकेगी ,
दुनिया से ,
मेरा अस्तित्व !
जब भी चाहो ,
मिलना तुम मुझसे ,
और चाहो ,
मेरे करीब होने का
करना  एहसास तुम ,
पढ़ लेना ,
फिर से एक बार मुझे !
होगा हर बार ,
तुम्हें आभास ,
मेरे होने का !
मरते नहीं हैं ,
विचार कभी भी !

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