Sunday, 19 August 2012

अब हमें दिल की बात कहने दो ( नज़्म / ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया = 1 7 भाग एक

अब हमें दिल की बात कहने दो - लोक सेतिया "तनहा"

अब हमें दिल की बात कहने दो ,
हो जो मुमकिन तो अश्क बहने दो।

सब चले जाएंगे कभी न कभी ,
कोई मेहमान अभी तो रहने दो।




वक़्त इसका इलाज कर देगा ,

दिल को अब तो ये दर्द सहने दो।

ख़त्म कर दो खामोशियों को आज ,
कहना है जो लबों को कहने दो।




रोक पाई न इश्क को दुनिया ,

ये तो दरिया है इसको बहने दो।

देखो खुद बन के तुम तमाशाई ,
हिलती दीवार घर की ढहने दो।

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