Sunday, 5 August 2012

माँ के आंसू ( कविता ) 1 7 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

कौन समझेगा ,
तेरी उदासी
तेरा यहाँ ,
कोई नहीं ,
उलझनें हैं ,
साथ तेरे ,
कैसे उन्हें ,
सुलझा सकोगी !
ज़िंदगी दी ,
जिन्हें तूने ,
वो भी न ,
हो सके  तेरे ,
बेरहम दुनिया को ,
तुम कैसे  ,
अपना बना सकोगी ,
सीने में अपने ,
दर्द सभी ,
कब तलक ,
छिपा सकोगी ,
तुम्हें किस बात ने ,
रुलाया आज ,
मां ,
तुम कैसे ,
बता सकोगी !

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