Friday, 3 August 2012

उस पार जाना ( कविता ) 1 5 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

ले चल मुझे ,
उस पार ,
मेरे माझी !
पूछा नहीं ,
कभी भी मैंने ,
कहाँ है ,
मेरे सपनों का ,
जहाँ !
तलाश करने ,
अपनी दुनिया ,
जाना है ,
उस पार मुझे ,
मैं  नहीं डरता ,
भंवर से,
तूफ़ान से ,
दिया नहीं कभी ,
किसी ने मेरा साथ , 
मगर तुम माझी हो मेरे ,
लगा दो पार ,
नैया मेरी ,
या डुबो दो भंवर में ,
तोड़ो मत मेरा दिल ,
ये कह कर ,
कि उस पार कुछ नहीं है !
कह दो ,
मेरे माझी ,
झूठा है ये  बहाना ,
 मुझे अब भी ,
है उस पार जाना !!    

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