Wednesday, 29 August 2012

ग़ज़ल 1 5 1 ( आपने जब पिलाना छोड़ दिया ) - लोक सेतिया "तनहा"

आपने जब पिलाना छोड़ दिया - लोक सेतिया "तनहा"

आपने जब पिलाना छोड़ दिया ,
मयकदे हमने जाना छोड़ दिया।

रोज़ महफ़िल जमाना छोड़ दिया ,
घर किसी को बुलाना छोड़ दिया।

अब कहीं आना जाना छोड़ दिया ,
आपका आशियाना छोड़ दिया।

दोस्तों का ठिकाना छोड़ दिया ,
दुश्मनों से निभाना छोड़ दिया।

ज़िंदगी को डराना छोड़ दिया ,
अब ज़हर रोज़ खाना छोड़ दिया।

चारागर को बुलाना छोड़ दिया ,
दर्द को खुद बढ़ाना छोड़ दिया।

गैर सारा ज़माना छोड़ दिया ,
आज "तनहा" ने माना छोड़ दिया।
                                                     
(  चारागर = डॉक्टर = चिकित्सक )

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