Monday, 13 August 2012

ग़ज़ल 1 4 4 ( दोस्त भूले दोस्ती हम क्या करें )

दोस्त भूले दोस्ती हम क्या करें ,
बन गए सब मतलबी हम क्या करें !
प्यार से देखा हमें जब आपने ,
ले गई दिल सादगी हम क्या करें  !
अब बताएं सब हुस्न वाले हमें ,
जब सताए आशिकी हम क्या करें !
एक दिन हम ढूंढ ही लेते खुदा ,
खो गई है ज़िंदगी हम क्या करें !
दिल हमारा लूट कर कल ले गईं ,
सब अदाएं आपकी हम क्या करें !
प्यार उनको जब रकीबों से हुआ ,
फिर हमारी बेबसी हम क्या करें !
आज कितना दूर देखो हो गया ,
आदमी से आदमी हम क्या करें  !
सब परेशां लग रहे इस शहर में ,
हम यहाँ पर अजनबी हम क्या करें !
आज "तनहा" मार डालेगी तुम्हें ,
अब किसी की बेरुखी हम क्या करें !

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