Sunday, 19 August 2012

याद तुम्हें करता है कोई ( नज़्म / ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया = 1 3 भाग एक

याद तुम्हें करता है कोई- लोक सेतिया "तनहा"

याद तुम्हें करता है कोई ,
जीते जी मरता है कोई।

लफ्ज़े-मुहब्बत अपनी जुबां पर ,
लाने से डरता है कोई।

दुनिया में इक वो ही हसीं है ,
इस का दम भरता है कोई।

सूखे फूल चढा कर कैसी ,
ये पूजा करता है कोई।

खुद से तन्हाई में बातें ,
दीवाना करता है कोई।

वादा करके भी वो न आया ,
यूँ भी ज़फा करता है कोई।  

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