Friday, 24 August 2012

ग़ज़ल 1 3 0 ( हम सभी इस तरह बंदगी करते ) - लोक सेतिया "तनहा"

हम सभी इस तरह बंदगी करते - लोक सेतिया "तनहा"

हम सभी इस तरह बंदगी करते ,
दुश्मनी छोड़ कर दोस्ती करते।

तुम अगर रूठते हम मना लेते ,
जो किया था कभी फिर वही करते।

जी सकेंगे नहीं बिन तुम्हारे हम ,
इस तरह से नहीं दिल्लगी करते।

क्यों नहीं छू लिया आसमां तुमने ,
काम मुश्किल नहीं गर कभी करते।

छोड़ आये जिसे घर तुम्हारा है ,
बस यही सोचकर वापसी करते।

ज़ुल्म सहते रहे हम ज़माने के ,
पर शिकायत किसी से नहीं करते।

एक हसरत लिये चल दिये "तनहा" ,
मत लगाते गले बात ही करते।  

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