Sunday, 12 August 2012

ग़ज़ल 1 2 0 ( हल तलाशें सभी सवालों का ) - लोक सेतिया "तनहा"

हल तलाशें सभी सवालों का - लोक सेतिया "तनहा"

हल तलाशें सभी सवालों का ,
है यही रास्ता उजालों का।

तख़्त वाले ज़रा संभल जायें ,
काफिला चल पड़ा मशालों का।

फूल भेजे हैं खुद रकीबों को ,
दे दिया है जवाब चालों का।

प्यास बुझती नहीं कभी उनकी ,
दर्द समझो कभी तो प्यालों का।

ख्वाब हम देखते रहे शब भर ,
मखमली से किसी के बालों का।

बेच डालें न देश को इक दिन ,
कुछ भरोसा नहीं दलालों का।

राज़ दिल के सभी खुले "तनहा" ,
कुछ नहीं काम दिल पे तालों का।

No comments: