Sunday, 12 August 2012

ग़ज़ल 1 2 0 ( हल तलाशें सभी सवालों का )

हल तलाशें सभी सवालों का ,
है यही रास्ता उजालों का  !
तख़्त वाले ज़रा संभल जायें ,
काफिला चल पड़ा मशालों का !
फूल भेजे हैं खुद रकीबों को ,
दे दिया है जवाब चालों का !
प्यास बुझती नहीं कभी उनकी ,
दर्द समझो कभी तो प्यालों का !
ख्वाब हम देखते रहे शब भर ,
मखमली से किसी के बालों का !
बेच डालें न देश को इक दिन ,
कुछ भरोसा नहीं दलालों का !
राज़ दिल के सभी खुले "तनहा" ,
कुछ नहीं काम दिल पे तालों का !

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