Sunday, 26 August 2012

ग़ज़ल 0 7 ( जा के किस से कहें हमको क्या चाहिए ) - लोक सेतिया

 जा के किस से कहें हमको क्या चाहिए - लोक सेतिया

जा के किस से कहें हमको क्या चाहिए ,
ज़हर कोई न कोई दवा चाहिए।

और कुछ भी तो हमको तम्मना नहीं ,
सांस लेने को थोड़ी हवा चाहिए।

हाल -ए -दिल आ के पूछे हमारा जो खुद ,
ऐसा भी एक कोई खुदा चाहिए।

अपनों बेगानों से अब तो दिल भर गया ,
एक इंसान इंसान सा चाहिए।

देख कर जिसको मिट जाएं दुनिया के ग़म ,
कोई मासूम सी वो अदा चाहिए।

जब कभी पास जाने लगे प्यार से ,
बस तभी कह दिया फ़ासिला चाहिए।

ज़िंदगी से नहीं और कुछ मांगना ,
दोस्त "तनहा" हमें आपसा चाहिए।

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