Sunday, 26 August 2012

ग़ज़ल 0 5 ( पास आया नज़र जो किनारा हमें ) - लोक सेतिया "तनहा"

पास आया नज़र जो किनारा हमें - लोक सेतिया "तनहा"

पास आया नज़र जो किनारा हमें ,
मौज ने दूर फेंका दोबारा हमें।

ख़ुदकुशी का इरादा किया जब कभी ,
यूँ लगा है किसी ने पुकारा हमें।

लड़खड़ाये तो खुद ही संभल भी गए ,
मिल न पाया किसी का सहारा हमें।

हो गई अब तो धुंधली हमारी नज़र ,
दूर से तुम न करना इशारा हमें।

दुश्मनों से न इतना करम हो सका ,
हमने चाहा जो मरना न मारा हमें।

हमको मालूम है मौत देगी सुकूं ,
ज़िंदगी से मिला बोझ सारा हमें।

बिन बुलाये यहां आप क्यों आ गये ,
सबने "तनहा" था ऐसे निहारा हमें।   

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