Sunday, 19 August 2012

खुद पे ही एतबार कर लो ( नज़्म / जीवन राह ) डॉ लोक सेतिया = 0 3 भाग एक

खुद पे ही एतबार कर लो ,
ज़िंदगी का तुम दीदार कर लो !
जो मंज़िल की चाह है तुम्हें ,
मुश्किलों से भी प्यार कर लो !
बेहतर है ये किनारे बैठने से ,
डूब जाओ या कि पार कर लो !
बदल सकते हो हवा का रुख ,
हौसला तुम एक बार कर लो !
कौन अपना है कौन बेगाना ,
प्यार से मिले जो प्यार कर लो ! 

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