Sunday, 19 August 2012

खुद पे ही एतबार कर लो ( नज़्म / जीवन राह ) डॉ लोक सेतिया = 0 3 भाग एक

खुद पे ही एतबार कर लो - लोक सेतिया "तनहा"

खुद पे ही एतबार कर लो ,
ज़िंदगी का तुम दीदार कर लो।

जो मंज़िल की चाह है तुम्हें ,
मुश्किलों से भी प्यार कर लो।

बेहतर है ये किनारे बैठने से ,
डूब जाओ या कि पार कर लो।

बदल सकते हो हवा का रुख ,
हौसला तुम एक बार कर लो।

कौन अपना है कौन बेगाना ,
प्यार से मिले जो प्यार कर लो।  

No comments: