Sunday, 8 July 2012

अलविदा ( कविता ) 0 9 भाग दो

तुम जा रहे हो ,
आज ,
छुड़ा कर मुझसे हाथ ,
भुला कर उम्र भर ,
साथ देने का वादा ,
जब मिल गया है ,
तुम्हें किनारा ।
चलो अच्छा हुआ ,
मिल गया तुम्हें  ,
कोई तो ऐसा
जो कर सके ,
पूरे तुम्हारे सपने  !
चाहा तो मैंने भी ,
यही था सदा ,
मगर कर न पाया कभी ,
मुझे और क्या चाहिये ,
तुम्हारी ख़ुशी से  बढ़कर ,
मैं जूझता रहा ,
तेज़ हवओं से ,
लड़ता रहा तूफानों से ,
नहीं डरा कभी ,
किसी भी भंवर से ,
समझा था मैंने सदा तुम्हें ,
अपनी  मंज़िल भी ,
किनारा भी ,
मैं खड़ा हूं  ,
वहीं उसी  कश्ती पर ,
थामे पतवार ,
बन के माझी ,
और देख रहा हूं  तुम्हें ,
आंसू लिये  ,
पलकों पर अपनी ,
कदम - कदम दूर जाते हुए ,
हाथ हिलाते हुए  !!