Saturday, 7 July 2012

उमंग यौवन की ( कविता ) 7 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

उमंग यौवन  की ( कविता )
ये मस्ती ,
ये अल्हड़पन ,
ये झूम के चलना ,
ये हर पल गुनगुनाना ,
ये सतरंगी सपने बुनना ,
ये हवाओं संग उड़ना ,
ये भीनी भीनी खुशबु ,
ये बहारों का मौसम ,
ये सब है तुम्हारा आज ,
ओर है सारा जहाँ तुम्हारा।
जी भर के जी लो ,
आज तुम इनको ,
कुछ ऐसे कि ,
याद रह जाए उम्र भर ,
इनका मधुर एहसास ,
यौवन में ,
कदम रखता हुआ ,
अठाहरवां साल है ये  !!

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