Thursday, 26 July 2012

ग़ज़ल 1 3 ( हमको ले डूबे ज़माने वाले , नाखुदा खुद को बताने वाले )- मेरी सब से लोकप्रिय ग़ज़ल - लोक सेतिया "तनहा"

 हमको ले डूबे ज़माने वाले , नाखुदा खुद को बताने वाले 

मेरी सब से लोकप्रिय ग़ज़ल - लोक सेतिया "तनहा"

हमको ले डूबे ज़माने वाले ,
नाखुदा खुद को बताने वाले।
देश सेवा का लगाये तमगा ,
फिरते हैं देश को खाने वाले।
ज़ालिमों चाहो तो सर कर दो कलम ,
हम न सर अपना झुकाने वाले।
उनको फुटपाथ पे तो सोने दो ,
ये हैं महलों को बनाने वाले। 
तूं कहीं मेरा ही कातिल तो नहीं ,
मेरी अर्थी को उठाने वाले।
तेरी हर चाल से वाकिफ़ था मैं ,
मुझको हर बार हराने वाले।
मैं तो आइना हूँ बच के रहना ,
अपनी सूरत को छुपाने वाले।

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