Saturday, 7 July 2012

नाट्यशाला ( कविता ) 0 6 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

                                                     नाट्यशाला ( कविता )
मैंने देखे हैं
कितने ही ,
नाटक जीवन में ,
महान लेखकों की ,
कहानियों पर ,
महान कलाकारों के ,
अभिनय के !
मगर नहीं ,
देख पाऊंगा मैं
वो विचित्र नाटक ,
जो खेला जाएगा ,
मेरे मरने के बाद
मेरे अपने ,
घर के आँगन में !
देखना आप सब ,
उसे ध्यान से ,
मुझे जीने नहीं दिया ,
जिन्होंने कभी ,
जो मारते  रहे हैं ,
बार बार मुझे ,
और मांगते रहे मेरे लिये ,
मौत की हैं  दुआएं ,
कर रहे होंगे ,
बहुत विलाप ,
नज़र आ रहे होंगे ,
बेहद दुखी ,
वास्तव में मन ही मन ,
होंगे प्रसन्न ,
कमाल का अभिनय ,
आएगा  तुम्हें नज़र ,
बन जाएगा  मेरा घर ,
एक नाट्यशाला!!

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